बिहारशरीफ:-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 मई को अपने पैतृक गांव कल्याण बीघा अपनी पत्नी मंजू सिन्हा की 16वीं पुण्यतिथि पर आए थे। उसी समय कल्याण विगहा से कुछ दूरी पर स्थित नीमा कोल गांव का 11 वर्षीय बालक सोनू कुमार उनसे मिलने आया था। उसने बेधड़क होकर मुख्यमंत्री को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सर, सर, मुझे कुछ कहना है के बाद सोनू पूरी दुनिया में छा गया। उसने मुख्यमंत्री को कहा कि मुझे आईएएस बनना है तथा मेरा नामांकन किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में करवा दें ,ताकि मैं अपने सपनों को पूरा कर सकूं।
सोनू की आवाज बिहार के तमाम सरकारी स्कूल के पठन-पाठन पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया था ,जिससे सरकारी स्कूल पढ़ाई के मामले में खासा बदनाम हो गया ।
सोनू ने संपूर्ण सरकारी स्कूलों पर उंगली उठाई थी। लेकिन, आज भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले के थरथरी प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय अस्ता शिक्षा के मामले में अलख जगा रहा है।
मध्य विद्यालय अस्ता संपूर्ण जिले के लिए एक नजीर बन गया है। नीमा कोल की तरह यह विद्यालय भी पढ़ाई के मामले में कभी फिसड्डी साबित हो रहा था ,तभी यहां की कमान तेज तरार प्रधानाध्यापक रंजीत कुमार को 21 मई 2018 को मिली।
विद्यालय का पदभार ग्रहण करते ही इन्होंने शिक्षा के गिर रहे स्तर को सुधारने का प्रयास किया ,जिसके फलस्वरूप आज इस विद्यालय में करीब 400 छात्र- छात्राएं पढ़ रहे हैं।
इन्होंने स्कूल में आते ही सर्वप्रथम इस स्कूल को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाने का प्रयास किया ।जिसके परिणाम स्वरूप आज यह विद्यालय अगल बगल दूर दराज आधे दर्जन गांव के बच्चे बच्चियां यहां पढ़ने के लिए आ रहे है ।जबकि उनके गांव में भी प्राथमिक विद्यालय हैं ,परंतु इस विद्यालय में अच्छी पढ़ाई होने के कारण यहां बच्चों की संख्या अधिक है।
बताया जाता है कि इस विद्यालय में अस्ता,खरज्जमा, पेन्दापुर,ढि़वरापर,चिनुआरा,जमालपुर, गवसपुर,पुरन्दरपुर तथा कोयल विगहा आज आदि गांव के बच्चे एवं बच्चियां पढ़ने के लिए आते हैं।
इस विद्यालय में पहली से आठवीं तक की पढ़ाई होती है प्रधानाध्यापक सहित 9 शिक्षक नियुक्त है।
जिस प्रकार प्राइवेट विद्यालय में प्रतिदिन असेंबली का आयोजन होता है तथा इससे प्राइवेट विद्यालयों की पहचान बनती है।
ठीक इसी प्रकार मध्य विद्यालय अस्ता में रोज असेंबली का आयोजन होता है। पूरा स्कूल मैदान छात्र- छात्राओं से भरा रहता है। सब प्रथम प्रार्थना होती हैं ।उसके बाद राष्ट्रीय गीत गाया जाता है।तब वंदे मातरम का गायन होता है। परेड करवाई जाती है और सबसे अंत में विद्यालय में नित्य प्रतिदिन एक नया छात्र मंच पर आकर छात्रों से समसामयिक एवं ऐतिहासिक विषयों पर प्रश्न पूछते हैं ।लगभग आधे दर्जन सवाल- जवाब प्रतिदिन होता है।
जब यह संवादाता ने असेंबली के समय समाचार कवरेज के लिए स्कूल पहुंचा तो ,देखा कि यह विद्यालय प्राइवेट विद्यालय से किसी भी मामले में कम नहीं है।
नीमा कोल विद्यालय ,गांव के ही एक होनहार सोनू के कारण चर्चा में आया था ।ठीक उसी प्रकार यह विद्यालय भी हमेशा चर्चा में बना रहता। दोनों विद्यालय का चर्चा विभिन्न कारणों से हो रहा है ।एक का पढा़ई नहीं होने के कारण चर्चा में है ,तो दूसरा विद्यालय बेहतरीन शिक्षा देने के कारण कुछ उच्च वर्ग के लोगों को खटक रहा है। बताया जाता है कि पैसे वाले लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में तथा गांव से दूर बिहारशरीफ तथा पटना में पढा़ रहे हैं ।ऐसे लोग ही विद्या का मंदिर विद्यालय में राजनीति कर ,पढ़ाई के अच्छे माहौल को फिर खराब करने पर तुले हुए हैं।
इन्हीं लोगों के द्वारा प्रधानाध्यापक रंजीत कुमार के खिलाफ मौका वे मौका आरोप लगाकर शिक्षा व्यवस्था को ध्वत करने में लगे हुए हैं।
प्रधानाध्यापक रंजीत कुमार ने बताया कि मैं जिस स्कूल में भी रहा हूं ,वहां के स्कूल में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने का हरदम प्रयास करता रहा हूं ।इसके पहले मैं गिरियक प्रखंड के आदमपुर मध्य मध्य विद्यालय में पदस्थापित था तथा वहां भी हमने प्रयास किया कि छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले। ताकि वह पढ़- लिख कर एक अच्छा नागरिक बनकर, देश की सेवा करें।
उन्होंने कहा कि पैसे वाले लोग तो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं ।परंतु, गरीब- गुरबा के बच्चे ,जिसमें पढ़ने की ललक है ,मेघावी हैं ,ऐसे बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ने आते हैं। अगर ऐसे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले तो, आगे चलकर उच्च पदों तक जाएंगे तथा अपने स्कूल के साथ-साथ पूरे प्रखंड का नाम रौशन करेंगे।

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