अल्लाह की रज़ा में बीता रमजान का पहला जुमा-रमजान के पहले जुमें की नमाज के लिए मस्जिदों में उमड़ी भीड़।
बिहारशरीफ:-अल्लाह की रज़ा में रमजान का पहला जुमा बीता।कोरोना की पाबंदियों के बीच दो सालों से रोजेदारों को एकसाथ नमाज पढ़ने की मनाही थी। पाबंदियां हटने के बाद रमजान के पहले जुमे की नमाज़ सभी ने एक साथ अदा की।बिहारशरीफ के शाही जामा मस्जिद पुलपर में जुमे की नमाज़ से पहले इमाम मुफ़्ती मोहम्मद मुजाहिद कासमी ने खुतबे में बताया कि यह रमज़ान का महीना का असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। जब हाथ उठे तो भलाई के लिए, कान सुने तो अच्छी बातें, कदम बढ़े तो नेकी के लिए, आंख देखे तो जायज चीजों को।बताया कि रोजा सब्र व इबादत का नाम है। रोजा गुनाहों से निजात का जरिया है। उन्होंने सदके फितर(वह चीज़ जो अल्लाह की राह में दी जाए)कि रकम 50 रुपये प्रति व्यक्ति अदाएगी करने की अपील की।नमाज़ के बाद उन्होंने खुशहाली, सुख और समृद्धि एवं बीमार को सेहतमंद की दुआ अल्लाह से मांगी।

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