रहमत और बरकत की रात शब-ए-बारात लोगों ने इबादत कर के मनाई।
बिहारशरीफ:-रहमत और बरकत की रात शब-ए-बारात मुसलमान समुदाय के लोगों ने रात में खुदा की इबादत कर के मनाई।यह इबादत और फजीलत की रात होती है.
शब-ए-बारात दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें शब का अर्थ होता है रात और बरात का अर्थ है बरी होना।मुस्लिम समुदाय में ये रात बेहद खास माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह की रहमतें बरसती हैं. शब-ए-रात को पाक रात माना जाता है और इस दिन मुसलमान समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत करते हैं. साथ ही उनसे हुए अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।वहीं अपने परिजनो की कब्र पर जाकर उनके मगफिरत की दुआएं भी मांगते हैं।बिहारशरीफ के बड़ी दरगाह इलाके में देर तक चहल पहल देखा गया।सड़कों पर 8 बजे रात्रि से लोग दरगाह एवं कब्रिस्तान की ओर जाते दिखे।पुलिस पदाधिकारी एवं दंडाधिकारी भी मस्जिदों एवं कब्रिस्तानों के बाहर तैनात दिखे।
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