मोगल कुआँ निवाशी डॉ जगदीष प्रसाद जिनकी उम्र 85 के असपास है अपने बुढ़ापे में अपनी खराब किस्मत के कारण शायद बच ना पाए।इस लाचार में कोई उनका देखने वाला नही एक बेटा था भी जो ब्रेन हैमर के कारण कुछ सालों पहले ही चल बसे उनके पूतोह बड़ी बेशर्मी के साथ कभी बीमार हालात में घर छोड़ कर चले जाएं या फिर आनाज के दाने तक के लिए तरस दे पाते पोतियों को भी मदद न करने दे । कल दिनांक 7 दिसंबर को अपनी बीमार हालात में लूज़ मोशन और कमजोरी के कारण आपने आंगन में ही जा गिरे रहे, किराये पर लगे किराने के दुकानदार को जब सके हुआ तो वे आपने पड़ोसियों के साथ ताले तोड़कर देखने गए और देखा कि बो आंगन में गिरे पड़े है घर से आती बदबू के कारण कोई जाना न चाहे फिर भी एक सजजन ने उनको उठाया और कपड़े पहनाकर किसतरह जामिन पर बिस्तर लगाकर उनको आपस के दबाई खिलाया। फिर भी वो अपने अपनी अंतिम सांस अकेले जीने के लिए मजबूर है कोई उनको देखने वाला नही। अब वो इच्छा मृत्यु मांगने के लिए मजबूर है।
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