स्वराज पार्टी (लो.) का आमंत्रण पत्र।
ओबरा, औरंगाबाद। (सत्ता में आमूल-चूल परिवर्तन हेतू संकल्पित राजनैतिक दल)
आमंत्रण-पत्र
सेवा में,
श्रीमान/श्रीमती............................................................................................. ............................................................................................
दोस्तो,भाईयो-बहनो, मजदूर-किसानों और छात्र-नवजवानों, सबको प्रणाम।
जैसा कि आप सबों को मालूम हो चुका है कि पांच बर्षो के बाद फिर से बिहार विधान सभा चुनाव का समय आ चुका है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्यासी 1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अपना-अपना नामांकन करेगे और अपनी जाति और पार्टी का नारा देते हुए आपका वोट लेने के लिये आपके पास जायेंगे परंतु मैं चुनाव लड़ूँ या नहीं? इस विषय पर आपकी राय जानना चाहता हूँ। वर्ष 2010 से 2015 तक विधायक रहते हुए मेरे कार्यकाल को आपने देखा है। मुझसे पहले भी जो भी माननीय विधायक रहे हैं। उनके कार्य को आप देख चुके थे और वर्तमान में जो माननीय विधायक हैं। उनके कार्य को भी आप भली-भाँति देख रहे हैं। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है।
आम जनता की इच्छा थी कि मैं किसी बड़ी पार्टी का टिकट लेकर आऊँ तो मुझे जीतने से कोई रोक नहीं सकता। मेरी ऐसी कोई तमन्ना नहीं थी कि फिर से विधायक बनूँ। फिर भी आपकी भावना का सम्मान करते हुए आपकी जाति वाली पार्टी के दरवाजें पर गया। परंतु वहाँ मेरा सुनने वाला कोई नहीं है क्योंकि मैं 5 सालों तक किसी बड़ी पार्टी के दरवाजें पर नहीं बल्कि जनता के दुख-दर्द में उसके साथ खड़ा रहा। ऐसी स्थिति में मेरे पास 2 ही विकल्प शेष है - या तो जनता के बल पर फिर से एक बार चुनाव लड़े या फिर चुनाव नहीं लड़े। इसका निर्णय मैं नहीं कर पा रहा हूँ और इसका निर्णय आपके ऊपर छोड़ता हूँ।
मैं नहीं कहता कि मुझमें बुराई नहीं है। एक सामान्य ब्यक्ति की जो कमी होती है, वो सारी कमी मुझमें भी मौजूद है। कहने का मतलब कि मैं जो भी हूँ आपके सामने हूँ। यदि ओबरा विधान सभा की जनता को मेरे प्रतिनिधत्व की जरूरत है तो मैं लड़ने को तैयार हूँ और यदि मेरे जैसे की जरूरत नहीं है तो फिर मुझे आपसे कोई शिकायत भी नहीं रहेगी।
चुनाव लड़े या नहीं लड़े! इस बात पर निर्णय हेतू अपने साथियों से राय-विचार बाद ओबरा में दिनांक 5 अक्टूबर, दिन - सोमवार को पूर्वाह्न 11:00 बजे से द गाइडेंस कोचिंग ओबरा के प्रांगण में एक बैठक का आयोजन किया गया है। आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि आप उस मीटिंग में अवश्य भाग ले और खुलकर अपनी बात रखे। आप यकीन करे कि जो आपकी इच्छा होगी! वही होगा। आप कहेंगे तो चुनाव लड़ेंगे और यदि आप नहीं कहेंगे तो फिर नहीं लड़ेगे परंतु दोनो ही शर्त्तों में आपसे पहले जैसा ही रिश्ता कायम रहेगा।
पुनः सबको सादर प्रणाम।
दिनांक - 29.09.20
आपका नाम
सोम प्रकाश
स्वराज पार्टी (लो.)
स्वराज पार्टी (लो.) का आमंत्रण पत्र।
ओबरा, औरंगाबाद। (सत्ता में आमूल-चूल परिवर्तन हेतू संकल्पित राजनैतिक दल)
आमंत्रण-पत्र
सेवा में,
श्रीमान/श्रीमती............................................................................................. ............................................................................................
दोस्तो,भाईयो-बहनो, मजदूर-किसानों और छात्र-नवजवानों, सबको प्रणाम।
जैसा कि आप सबों को मालूम हो चुका है कि पांच बर्षो के बाद फिर से बिहार विधान सभा चुनाव का समय आ चुका है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्यासी 1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक अपना-अपना नामांकन करेगे और अपनी जाति और पार्टी का नारा देते हुए आपका वोट लेने के लिये आपके पास जायेंगे परंतु मैं चुनाव लड़ूँ या नहीं? इस विषय पर आपकी राय जानना चाहता हूँ। वर्ष 2010 से 2015 तक विधायक रहते हुए मेरे कार्यकाल को आपने देखा है। मुझसे पहले भी जो भी माननीय विधायक रहे हैं। उनके कार्य को आप देख चुके थे और वर्तमान में जो माननीय विधायक हैं। उनके कार्य को भी आप भली-भाँति देख रहे हैं। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है।
आम जनता की इच्छा थी कि मैं किसी बड़ी पार्टी का टिकट लेकर आऊँ तो मुझे जीतने से कोई रोक नहीं सकता। मेरी ऐसी कोई तमन्ना नहीं थी कि फिर से विधायक बनूँ। फिर भी आपकी भावना का सम्मान करते हुए आपकी जाति वाली पार्टी के दरवाजें पर गया। परंतु वहाँ मेरा सुनने वाला कोई नहीं है क्योंकि मैं 5 सालों तक किसी बड़ी पार्टी के दरवाजें पर नहीं बल्कि जनता के दुख-दर्द में उसके साथ खड़ा रहा। ऐसी स्थिति में मेरे पास 2 ही विकल्प शेष है - या तो जनता के बल पर फिर से एक बार चुनाव लड़े या फिर चुनाव नहीं लड़े। इसका निर्णय मैं नहीं कर पा रहा हूँ और इसका निर्णय आपके ऊपर छोड़ता हूँ।
मैं नहीं कहता कि मुझमें बुराई नहीं है। एक सामान्य ब्यक्ति की जो कमी होती है, वो सारी कमी मुझमें भी मौजूद है। कहने का मतलब कि मैं जो भी हूँ आपके सामने हूँ। यदि ओबरा विधान सभा की जनता को मेरे प्रतिनिधत्व की जरूरत है तो मैं लड़ने को तैयार हूँ और यदि मेरे जैसे की जरूरत नहीं है तो फिर मुझे आपसे कोई शिकायत भी नहीं रहेगी।
चुनाव लड़े या नहीं लड़े! इस बात पर निर्णय हेतू अपने साथियों से राय-विचार बाद ओबरा में दिनांक 5 अक्टूबर, दिन - सोमवार को पूर्वाह्न 11:00 बजे से द गाइडेंस कोचिंग ओबरा के प्रांगण में एक बैठक का आयोजन किया गया है। आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि आप उस मीटिंग में अवश्य भाग ले और खुलकर अपनी बात रखे। आप यकीन करे कि जो आपकी इच्छा होगी! वही होगा। आप कहेंगे तो चुनाव लड़ेंगे और यदि आप नहीं कहेंगे तो फिर नहीं लड़ेगे परंतु दोनो ही शर्त्तों में आपसे पहले जैसा ही रिश्ता कायम रहेगा।
पुनः सबको सादर प्रणाम।
दिनांक - 29.09.20
आपका नाम
सोम प्रकाश
स्वराज पार्टी (लो.)

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