निजी स्कूलों के नाम मनोहर कुमार चौधरी का पत्र।
बिहारशरीफ, राजगिर।
प्रिय साथियों,
आज हम सभी आर्थिक चुनौतियों के दौर में हैं। कोचिंग,स्कूल या अन्य हमारे काम धन्धा ठप्प हो गया। पेमेंट नहीं आ रही,आमदनी न के बराबर है ।
याद रखना है कि ये हालात हमारी वजह से नहीं आए हैं। यह हालत विदेशी लोगों ने लायें हैं। आप खुद को दोष न दें। न हार, न अपमानित महसूस करें। रास्ता नज़र नहीं आएगा, लेकिन हिम्मत न हारें। कम से कम खर्च करें।
किस्तों में कटौती करे ।अपनी मानसिक परेशानियों को लेकर अकेले न रहें। दोस्तों से बात करें,
रिश्तेदारों से बात करें। किसी तरह का बुरा ख़्याल आए तो न आने दें।इस स्थिति से कोई नहीं बच सकता।
धीरे धीरे खुद को पहाड़ काट कर नया रास्ता बनाने के लिए तैयार करें। अपनी भाषा या सोच खराब न करें। कुछ भी हो जाए, जीना है, कल के लिए।
धीरज रखें। कम में जीना है। यह वक्त हमारा इम्तहान लेने आया है।भरोसा रखिए जब हम एक बार शून्य से शुरू कर यहाँ तक आये थे तो एक और बार शून्य से शुरू कर हम कहीं से कहीं पहुँच जाएँगे।
बस यूँ समझिए कि हम *लूडो* (सांप सीढ़ी) खेल रहे थे। 99 पर साँप ने काट लिया है लेकिन हम गेम से बाहर नहीं हुए हैं। क्या पता कब सीढ़ी मिल जाए। थोड़े दिन झटके लगेंगे, उदासी रहेगी लेकिन हँसते-मुस्कराते रहिये।
हम दोबारा बैलगाड़ी से शुरुआत करके *मर्सिडीज* तक पहुंचने का हौसला रखते हैं।
अपनी सेहत का ध्यान रखें ।अपने आपको परिवार को बीमारी से बचाकर रखें यही हमारी 2020 वें साल की कमाई है।

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