अवमानना कानून के खिलाफ प्रतिरोध मार्च नालन्दा में।                 
बिहारशरीफ। न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की बात उठाने पर हमारे न्यायाधीश उसकी जाँच कराने के बजाय आवाज उठाने वाले को ही CONTEMPT OF COURTS ACT 1971 के प्रावधानो के तहत दोषी ठहरा दे रहे हैं। इस तरह यदि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को भी यह शक्ति प्रदान कर दी जाये कि उसके भ्रष्टाचार को उजागर करने पर उसकी जाँच कराने के बजाय आवाज उठाने वाले को दोषी ठहरा दिया जायेगा तो फिर वह व्यक्ति या संस्था उस कानून की आड़ में अपनी मनमानी करता रहेगा और दोषी ठहरा देने और सजा के भय से भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का कोई भी व्यक्ति साहस न कर पायेगा। तो फिर इस तरह देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो जायेगी। जो तकरीबन हमारे देश में हो चुका है। ऐसा ही वाक्या हमारे देश में तब देखने को मिला जब विद्वान अधिवक्ता श्री प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया तो उस जज के विरूद्ध जाँच कराने के बजाय आरोप लगाने वाले अधिवक्ता को ही CONTEMPT OF COURT का दोषी साबित कर दिया गया। अधिवक्ता प्रशांत भूषण को दोषी ठहरा देने के बाद अब क्या किसी की हिम्मत रह जायेगी कि वो भ्रष्ठ जज को भष्ट कह सके? इसका मतलब कि अब हमारे देश में जनतंत्र नहीं बल्कि जजतंत्र है।

 हम स्वराज पार्टी के लोग इस काले कानून का विरोध करते हैं। इस कड़ी में स्वराज पार्टी ने 19/08/2020 को राजधानी पटना में CONTEMPT OF COURTS ACT 1971 विषयक पर विचार गोष्ठी आयोजीत कर समाज के विभिन्न तबकों की राय जाना और जनभावना के अनुरूप आज बिहारशरीफ के श्रम कल्याण मैदान से प्रतिरोध मार्च करते हुए सामाहरणालय जाकर जिलाधिकारी महोदय को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से जनहित में इस काले कानून को रद्द करने का आग्रह किया गया। आज के प्रतिरोध मार्च में फाईट फ़ॉर जस्टिस और स्वराज पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा अनेक अधिवक्ता और समाज सेवी ने भाग लिया।