अवमानना कानून के विरोध में प्रतिरोध मार्च फाइट फोर जस्टिस एवं स्वराज पार्टी के द्वारा।
पटना। स्वराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोम प्रकाश सिंह ने अवमानना कानून पर कहा कि लोकतंत्र में जब कानून का सही तरीके पालन नहीं होता है और अन्याय चरम सीमा पर पहुँच जाता है और जनता को जब कही भी न्याय नहीं मिल पाता है तो वो न्यायालय की तरफ आस्था भरी नजरों से देखता है। परंतु जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आम नागरिकों के गले नहीं उतर रहा हो और जज का फैसला भी किसी खास वर्ग विशेष या किसी पार्टी विशेष से प्रभावित लगता हो। तब न्यायपालिका की विश्वसनीयता ही संदेह की दायरे में आ जाती है। तब आम नागरिक का दायित्व हो जाता है कि वो न्यायिक ब्यवस्था में ब्याप्त खामियों को उजागर करे ताकि उन कमियों को दूर कर न्यायिक ब्यवस्था को दुरूस्त किया जा सके। वर्तमान समय में हमारे देश की न्यायपालिका इस दौर से गुजर रही है। श्री सिंह ने कहा जब विद्वान अधिवक्ता श्री प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया तो उस जज के विरूद्ध जाँच कराने के बजाय आरोप लगाने वाले अधिवक्ता को ही CONTEMPT OF COURT का दोषी साबित कर दिया गया। इसका मतलब कि यदि आम नागरिक पर भ्रष्ट होने का आरोप लगे तो वो जेल जायेगा परंतु जज पर आरोप लगे तो आरोप लगाने वाला ही जेल जायेगा। पार्टी उपाध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने का कि इस तरह माननीय न्यायालय द्वारा CONTEMPT OF COURT का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कथित लेकर प्रतिरोध मार्च कारगिल चौक से राजभवन कि ओर कुछ किया वह के स्थानीय प्रशासन ने प्रतिरोध मार्च को रोक कर देलीगेट को राज्यपाल महोदय महोदय के पास शान्ति पूर्वक जाने को कहा। हाई कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार यादव प्रतिरोध मार्च में शामिल होकर फाइट फोर जस्टिस के बैनर तले महामहिम राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपा और साथ ही स्वराज पार्टी ने भी महामहिम राज्यपाल महोदय को ज्ञापन सौंपा।

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