सी.आई. डी.जाँच शुरू होने से पहले ही लंबी छुट्टी पर निकल गये एस.पी. साहब।
औरंगाबाद ओबरा। पूर्व विधायक सोम प्रकाश ने पुलिस अधीक्षक औरंगाबाद दीपक वर्णवाल के विरूद्ध भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पुलिस मुख्यालय से कारवाई की माँग किया था और कारवाई न होने पर स्वराज पार्टी ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा किया था। पुलिस अधीक्षक औरंगाबाद दीपक वर्णवाल के विरूद्ध लगाये गये आरोपों की जाँच हेतू सी.आई.डी. की टीम कल औरंगाबाद पहुँची और भ्रष्टाचार के विंदू पर मुफ्फसिल थाना और ओबरा थाना के पदाधिकारियों से पूछताछ किया। परंतु पुलिस अधीक्षक के लंबे अवकाश पर निकल जाने के कारण उनसे पूछताछ न हो सकी। सी.आई.डी. टीम पूर्व विधायक सोम प्रकाश के पास भी पहुँची और लगाये गये आरोपों के संबंध में सबूत की माँग किया। सोम प्रकाश ने सभी संबंधित कागजात सी.आई.डी. को सौंपा। सी.आई.डी. टीम के समक्ष सोम प्रकाश ने बताया कि एस.पी. साहब के कथित भ्रष्टाचारों को वे उजागर करते रहते थे। जिस कारण एस.पी. साहब उनको सबक सीखाने की ताक में लगे हुए थे। पिछले लोक सभा चुनाव में नामांकन यात्रा में शामिल होने हेतू रफीगंज से आ रही 2 बसों पर स्वराज पार्टी का बैनर लगा हुआ था। जिस कारण उन दोनो बसों को जब्त कर दोनो बसों के चालक के साथ-साथ स्वराज पार्टी अध्यक्ष सोम प्रकाश पर भी केस दर्ज कर दिया गया था। अपने ऊपर केस होने की सूचना पर सोम प्रकाश एस.पी. साहब से मिलकर बताया था कि जिस धारा में केस दर्ज किया गया है, उस धारा में केस दर्ज हो ही नहीं सकता। एस.पी. साहब ने केस खत्म कर देने की बात कहा था। परंतु एस.पी. साहब ने केस खत्म नहीं कराया बल्कि न्यायपालिका को भी गुमराह करके उस झूठे केस में वारंट और कुर्की जप्ती ले लिया, ताकि समय पर सबक सीखा सके। जब सोम प्रकाश ने ओबरा के ललन साव पर हुए पुलिस दमन की बात निकाला तो एस.पी. साहब ने उसी झूठे केस में लॉकडाउन की अवधि में वो भी रात में सोम प्रकाश के घर पर छापामारी करा दिया ताकि सोम प्रकाश डर जाये और पीछे हट जाये। परंतु जेल जाने के भय से सोम प्रकाश पीछे नहीं हटे और भ्रष्टाचार के विरूद्ध लडाई में लगे रहे। एस.पी. साहब के भ्रष्टाचार के विरूद्ध पुलिस मुख्यालय में लिखित शिकायत दिये और पुलिस मुख्यालय ने जाँच में पाया कि सोम प्रकाश के विरूद्ध दर्ज केस झूठा केस है। एस.पी. साहब ने आनन-फानन में केस को फाईनल करते हुए न्यायालय से निर्गत वारंट और कुर्की जप्ती को लौटा दिया। सी.आई.डी. की टीम ने ओबरा के ललन साव से भी पूछताछ किया। सी.आई.डी. के समक्ष ललन साव ने बताया कि 9 मई को जब वे अपने चाय दुकान की सफाई कर रहे थे तभी ओबरा थाना की पुलिस पहुँच गयी और लॉकडाउन में दुकान खोलने पर उनके साथ-साथ उनके पुत्र मनोज साव एवं पोता लाला के साथ मारपीट किया और उन्हें पकड़कर थाना ले जाने लगी। सूचना पाकर उनकी पत्नी और गाँव के कई लोग पहुँच गये। दरोगाजी ने 10 हजार रूपये की माँग किया परंतु उनकी पत्नी गाँव से कर्ज लेकर 3 हजार रूपये ही जुटा पायी। 3 हजार रूपये लेने पर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। पहले से ही गरीबी से जूझ रहे ललन साव ने पूर्व विधायक सोम प्रकाश को अपने साथ घटित घटना को बताया और सपरिवार जहर खाकर आत्म-हत्या कर लेने की बात कहा। सोम प्रकाश ने एस.पी. और आई.जी साहब को घटना की सूचना देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कारवाई की माँग किया। परंतु दोषी पुलिसकर्मियों पर कारवाई होने के बजाय पुलिस ने उसी रात सोम प्रकाश के घर पर छापामारी कर दिया। ललन साव ने बताया कि थाना में लिखित शपथ-पत्र देने के बावजूद आज तक उनका केस दर्ज नहीं हुआ और ना ही उनका पैसा वापस मिला। सी.आई.डी. की टीम के समक्ष ओबरा के वसंत चौधरी ने ब्यान दिया कि उनकी नाबालिग पुत्री घर से गायब थी और इसकी सूचना उन्होंने थाना पर दिया था परंतु पुलिस 3 दिनों तक कोई कारवाई की तो उन्होंने 12 जून को पूर्व विधायक सोम प्रकाश से अपनी व्यथा सुनाया और विधायक जी ने एस.पी. साहब और आई.जी. साहब से बात किया तो पुलिस ने उनका केस तो दर्ज कर लिया परंतु विधायक जी के घर पर उसी दिन छापामारी कर दिया। पार्टी महासचिव कुमार राजेश ने बताया कि चूँकि सोम प्रकाश पूर्व विधायक होने के साथ-साथ पुलिस पदाधिकारी भी रहे हैं और जब पुलिस उनके साथ ऐसा गलत कर सकती है तो फिर आम जनता के साथ क्या कर सकती है, सहज अनुमान लगाया जा सकता है। स्वराज पार्टी ने कहा कि आंदोलन को 15 दिन के लिये विराम दिया गया है। यदि 15 दिनों के अंदर एस.पी. साहब पर कारवाई नहीं हुई तो इस बार पार्टी का आंदोलन वृहद आंदोलन होगा।
औरंगाबाद ओबरा। पूर्व विधायक सोम प्रकाश ने पुलिस अधीक्षक औरंगाबाद दीपक वर्णवाल के विरूद्ध भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पुलिस मुख्यालय से कारवाई की माँग किया था और कारवाई न होने पर स्वराज पार्टी ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा किया था। पुलिस अधीक्षक औरंगाबाद दीपक वर्णवाल के विरूद्ध लगाये गये आरोपों की जाँच हेतू सी.आई.डी. की टीम कल औरंगाबाद पहुँची और भ्रष्टाचार के विंदू पर मुफ्फसिल थाना और ओबरा थाना के पदाधिकारियों से पूछताछ किया। परंतु पुलिस अधीक्षक के लंबे अवकाश पर निकल जाने के कारण उनसे पूछताछ न हो सकी। सी.आई.डी. टीम पूर्व विधायक सोम प्रकाश के पास भी पहुँची और लगाये गये आरोपों के संबंध में सबूत की माँग किया। सोम प्रकाश ने सभी संबंधित कागजात सी.आई.डी. को सौंपा। सी.आई.डी. टीम के समक्ष सोम प्रकाश ने बताया कि एस.पी. साहब के कथित भ्रष्टाचारों को वे उजागर करते रहते थे। जिस कारण एस.पी. साहब उनको सबक सीखाने की ताक में लगे हुए थे। पिछले लोक सभा चुनाव में नामांकन यात्रा में शामिल होने हेतू रफीगंज से आ रही 2 बसों पर स्वराज पार्टी का बैनर लगा हुआ था। जिस कारण उन दोनो बसों को जब्त कर दोनो बसों के चालक के साथ-साथ स्वराज पार्टी अध्यक्ष सोम प्रकाश पर भी केस दर्ज कर दिया गया था। अपने ऊपर केस होने की सूचना पर सोम प्रकाश एस.पी. साहब से मिलकर बताया था कि जिस धारा में केस दर्ज किया गया है, उस धारा में केस दर्ज हो ही नहीं सकता। एस.पी. साहब ने केस खत्म कर देने की बात कहा था। परंतु एस.पी. साहब ने केस खत्म नहीं कराया बल्कि न्यायपालिका को भी गुमराह करके उस झूठे केस में वारंट और कुर्की जप्ती ले लिया, ताकि समय पर सबक सीखा सके। जब सोम प्रकाश ने ओबरा के ललन साव पर हुए पुलिस दमन की बात निकाला तो एस.पी. साहब ने उसी झूठे केस में लॉकडाउन की अवधि में वो भी रात में सोम प्रकाश के घर पर छापामारी करा दिया ताकि सोम प्रकाश डर जाये और पीछे हट जाये। परंतु जेल जाने के भय से सोम प्रकाश पीछे नहीं हटे और भ्रष्टाचार के विरूद्ध लडाई में लगे रहे। एस.पी. साहब के भ्रष्टाचार के विरूद्ध पुलिस मुख्यालय में लिखित शिकायत दिये और पुलिस मुख्यालय ने जाँच में पाया कि सोम प्रकाश के विरूद्ध दर्ज केस झूठा केस है। एस.पी. साहब ने आनन-फानन में केस को फाईनल करते हुए न्यायालय से निर्गत वारंट और कुर्की जप्ती को लौटा दिया। सी.आई.डी. की टीम ने ओबरा के ललन साव से भी पूछताछ किया। सी.आई.डी. के समक्ष ललन साव ने बताया कि 9 मई को जब वे अपने चाय दुकान की सफाई कर रहे थे तभी ओबरा थाना की पुलिस पहुँच गयी और लॉकडाउन में दुकान खोलने पर उनके साथ-साथ उनके पुत्र मनोज साव एवं पोता लाला के साथ मारपीट किया और उन्हें पकड़कर थाना ले जाने लगी। सूचना पाकर उनकी पत्नी और गाँव के कई लोग पहुँच गये। दरोगाजी ने 10 हजार रूपये की माँग किया परंतु उनकी पत्नी गाँव से कर्ज लेकर 3 हजार रूपये ही जुटा पायी। 3 हजार रूपये लेने पर पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। पहले से ही गरीबी से जूझ रहे ललन साव ने पूर्व विधायक सोम प्रकाश को अपने साथ घटित घटना को बताया और सपरिवार जहर खाकर आत्म-हत्या कर लेने की बात कहा। सोम प्रकाश ने एस.पी. और आई.जी साहब को घटना की सूचना देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कारवाई की माँग किया। परंतु दोषी पुलिसकर्मियों पर कारवाई होने के बजाय पुलिस ने उसी रात सोम प्रकाश के घर पर छापामारी कर दिया। ललन साव ने बताया कि थाना में लिखित शपथ-पत्र देने के बावजूद आज तक उनका केस दर्ज नहीं हुआ और ना ही उनका पैसा वापस मिला। सी.आई.डी. की टीम के समक्ष ओबरा के वसंत चौधरी ने ब्यान दिया कि उनकी नाबालिग पुत्री घर से गायब थी और इसकी सूचना उन्होंने थाना पर दिया था परंतु पुलिस 3 दिनों तक कोई कारवाई की तो उन्होंने 12 जून को पूर्व विधायक सोम प्रकाश से अपनी व्यथा सुनाया और विधायक जी ने एस.पी. साहब और आई.जी. साहब से बात किया तो पुलिस ने उनका केस तो दर्ज कर लिया परंतु विधायक जी के घर पर उसी दिन छापामारी कर दिया। पार्टी महासचिव कुमार राजेश ने बताया कि चूँकि सोम प्रकाश पूर्व विधायक होने के साथ-साथ पुलिस पदाधिकारी भी रहे हैं और जब पुलिस उनके साथ ऐसा गलत कर सकती है तो फिर आम जनता के साथ क्या कर सकती है, सहज अनुमान लगाया जा सकता है। स्वराज पार्टी ने कहा कि आंदोलन को 15 दिन के लिये विराम दिया गया है। यदि 15 दिनों के अंदर एस.पी. साहब पर कारवाई नहीं हुई तो इस बार पार्टी का आंदोलन वृहद आंदोलन होगा।

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