किडनी की बीमारी का होम्योपैथी से इलाज संभव:- डॉ अभय कुमार।
किडनी बीमारियों की पहचान के लिए ब्लड यूरिया, सिरम क्रिएटिनिन, सिरम इलेक्ट्रोलाइट व किडनी फंक्शन टेस्ट कराते हैं। 40 की उम्र के बाद ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीजों को ब्लड प्रेशर, एचबीए 1 सी की जांच कराते हैं। इसका इलाज होम्योपैथी में किया जाता है।
स्थिति अनुसार तय करते दवा की पोटेंसी होम्योपैथी में इलाज किया जाता है। सामान्य सावधानियां बरतनी होती हैं। डॉ अभय ने बताया कि एलोपैथी के साथ होम्योपैथी दवाएं ले सकते हैं। खट्टी चीजों से परहेज करें। बैक्टीरिया, फंगल से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) होता है। बुखार, कंपकंपी व पैरों में सूजन आती है। इसके लिए लाइकोपोडियम, कैन्थारिस, नैट्रमम्यूर दवाएं देते हैं। स्टोन यदि दाहिनी तरफ है तो लाइकोपोडियम व बर्बैरिस बल्गैरिस, हाइड्रेन्जिया जैसी दवाएं देते हैं। दवाओं की पोटेंसी व मात्रा चिकित्सक तय करते हैं। डॉक्टर श्री कुमार ने कहा कि अपने मन से दवाएं न लें।
क्रॉनिक बीमारी में औषधियां भी कारगर।
मरीजों में घरेलू नुस्खे के साथ होम्योपैथी दवाएं कारगर होती हैं। अदरक, प्याज, लहसुन का प्रयोग किडनी के लिए फायदेमंद है। क्रॉनिक किडनी मरीजों को लाभ मिलता है। ये औषधियां विशेषज्ञ डॉ की सलाह के बाद ही लें। नियमित अनुलोम-विलोम से भी काफी फायदा मिलता है।
डॉ अभय कुमार, ग्राम- कोरवा, इस्लामपुर (नालंदा) बिहार।

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