राष्ट्र निर्माण मे सच्ची पत्रकारिता और इमान्दार पत्रकार की मुख्य भूमिका बेहद ज़रूरी:मुनव्वर हुसैन खान(जेनरल सेक्रेटरी नालन्दा ज़िला एसडीपीआई)
जहाँ पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, चाईना और इंडिया के बीच तना-तनी और झड़प देखने को मिल रही है, बेरोज़गारी अपने चरम सीमा पर है, किसान और मजदूर मर रहे हैं, देश मे रेप की घटना आये दिन सुन्ने को मिल रही है, कई राज्य बाढ़ से बदहाल हैं! वहीं हमारी नेशनल मीडीया की ज़िम्मेदारी इन मुद्दो को उठाकर सरकार से और अन्य विभागो से सवाल करने की और ज़रूरतमन्दो के ज़रूरत के लिए आवाज़ उठाने की होनी चाहिए! लेकिन इसके विपरीत मीडीया के न्यूज़ का मसाला क्या है, किसी अमीर या फ़ेमस परिवार को कोरोना हुआ तो उनके सोने, उठने, खाने पीने, बाथरूम जाने तक की ऐक्टिविटी को समाचार का हेड्लाइन बनाया जाता है! बकरीद के नमाज़ से लेकर बकरे की क़ुरबानी तक की परम्परा को डीबेट का मुद्दा बना कर पूरे देश में नफ़रत को हवा में घोलने का काम किया जाता है! क्या हमारे देश में हक़ीक़त समस्याओ की कमी है, या समाज में पूर्णरूप से खुशहाली, रोज़गार और सुरक्षा व्यवस्था क़ायेम हो चुकी है! अगर नहीं तो पत्रकारिता के महान कार्य को असल मुद्दे से भट्काने के लिए क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, यह एक बड़ा चिन्तन का विषय है!
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता को माना जाता है, और अगर ये स्तम्भ कमज़ोर होकर गिरने को मजबूर है तो लोकतंत्र की मज़बूत इमारत का दगमगाना लाज़मी है!
हमसब नितदिन समस्याओ से घिरे हैं और हर एक नागरिक अपनी बात को लेकर दिल्ली तक जाए ये सम्भवत नामुम्किन है, ऐसे में मीडीया की ज़िम्मेदारी है कि वह जन जन की अवाज़ बन कर उनको इन्साफ़ दिलाए!
सही मायने में देश के तमाम समस्याओ को सवाल बना कर उठाना और सत्ता से सवाल करना इस समय वक़्त की मांग है और यही वक़्त की सच्ची अवाज़ होगी!
बिहारशरीफ़ शहर से जुड़ी खबर को हमेशा सामने लाने का सराहनीय कार्य, चाहे लाउकडाउन के समय जिस व्यक्ति या संगठन ने किया है, या SDPI के द्वारा जो भी समाज हित मे भलाई का कार्य हुआ, चाहे रशन वित्रण्, कोरोना से मरने वाले लोगों का अन्तिम संस्कार या दफ़न करने की प्रक्रिया, इस पत्रकार ने हमेशा इमानदारी और इनके पोर्टल और पत्रिका ने उस खबर को सच्चाई के साथ लोगों तक पहुँचाया है! आज भी समाज में कहीं ना कहीं ये लोकतंत्र का चौथा अपना भूमिका निभाता हुआ नज़र आता है! हम सभी को ऐसी सच्ची पत्रकारिता की सराहना करके, इनका साथ देकर आगे लाना चाहिए, ताकि ऐसे लगन और इमानदारी से पत्रकारिता करने वाले पत्रकार राष्ट्र निर्माण मे वही भुमिका निभा सकें जिसकी इस राष्ट्र को अभी के वक़्त में सख्त ज़रूरत है!
जहाँ पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, चाईना और इंडिया के बीच तना-तनी और झड़प देखने को मिल रही है, बेरोज़गारी अपने चरम सीमा पर है, किसान और मजदूर मर रहे हैं, देश मे रेप की घटना आये दिन सुन्ने को मिल रही है, कई राज्य बाढ़ से बदहाल हैं! वहीं हमारी नेशनल मीडीया की ज़िम्मेदारी इन मुद्दो को उठाकर सरकार से और अन्य विभागो से सवाल करने की और ज़रूरतमन्दो के ज़रूरत के लिए आवाज़ उठाने की होनी चाहिए! लेकिन इसके विपरीत मीडीया के न्यूज़ का मसाला क्या है, किसी अमीर या फ़ेमस परिवार को कोरोना हुआ तो उनके सोने, उठने, खाने पीने, बाथरूम जाने तक की ऐक्टिविटी को समाचार का हेड्लाइन बनाया जाता है! बकरीद के नमाज़ से लेकर बकरे की क़ुरबानी तक की परम्परा को डीबेट का मुद्दा बना कर पूरे देश में नफ़रत को हवा में घोलने का काम किया जाता है! क्या हमारे देश में हक़ीक़त समस्याओ की कमी है, या समाज में पूर्णरूप से खुशहाली, रोज़गार और सुरक्षा व्यवस्था क़ायेम हो चुकी है! अगर नहीं तो पत्रकारिता के महान कार्य को असल मुद्दे से भट्काने के लिए क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, यह एक बड़ा चिन्तन का विषय है!
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता को माना जाता है, और अगर ये स्तम्भ कमज़ोर होकर गिरने को मजबूर है तो लोकतंत्र की मज़बूत इमारत का दगमगाना लाज़मी है!
हमसब नितदिन समस्याओ से घिरे हैं और हर एक नागरिक अपनी बात को लेकर दिल्ली तक जाए ये सम्भवत नामुम्किन है, ऐसे में मीडीया की ज़िम्मेदारी है कि वह जन जन की अवाज़ बन कर उनको इन्साफ़ दिलाए!
सही मायने में देश के तमाम समस्याओ को सवाल बना कर उठाना और सत्ता से सवाल करना इस समय वक़्त की मांग है और यही वक़्त की सच्ची अवाज़ होगी!
बिहारशरीफ़ शहर से जुड़ी खबर को हमेशा सामने लाने का सराहनीय कार्य, चाहे लाउकडाउन के समय जिस व्यक्ति या संगठन ने किया है, या SDPI के द्वारा जो भी समाज हित मे भलाई का कार्य हुआ, चाहे रशन वित्रण्, कोरोना से मरने वाले लोगों का अन्तिम संस्कार या दफ़न करने की प्रक्रिया, इस पत्रकार ने हमेशा इमानदारी और इनके पोर्टल और पत्रिका ने उस खबर को सच्चाई के साथ लोगों तक पहुँचाया है! आज भी समाज में कहीं ना कहीं ये लोकतंत्र का चौथा अपना भूमिका निभाता हुआ नज़र आता है! हम सभी को ऐसी सच्ची पत्रकारिता की सराहना करके, इनका साथ देकर आगे लाना चाहिए, ताकि ऐसे लगन और इमानदारी से पत्रकारिता करने वाले पत्रकार राष्ट्र निर्माण मे वही भुमिका निभा सकें जिसकी इस राष्ट्र को अभी के वक़्त में सख्त ज़रूरत है!

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