एक तरफ सरकार व्यक्तियों के काम को बंद कर दी और दूसरी ओर EMI समयावधि बढ़ाने  के दौरान लोन का  ब्याज का भुगतान करने के लिए कह रही है।

“EMI व (ब्याज) को 3-6 महीने  के के अंत में ईएमआई में जोड़ा जाएगा। इसे एक बार में भुगतान करना होगा या सभी भविष्य की ईएमआई में समान रूप से विभाजित करना होगा। ग्राहकों के लिए मासिक बिल में वृद्धि होगी… वर्तमान परिदृश्य में, जब भारत सरकार द्वारा आजीविका के सभी साधनों को बंद कर दिया गया है और व्यापारियों के पास आजीविका कमाने का कोई रास्ता नहीं है, तो ब्याज का लेना कहाँ तक सही है?

हम मानते है कि सरकार ने यह लॉकडाऊन हम जनता के हित को ध्यान में रखकर लगाया गया है । 
परंतु यह भी उतना हीं सत्य की जैसे जैसे यह अवधि बढ़ रही है , जीवन दुस्कर हो रहा है।
ऐसे में बैंकों का , ब्याज, बिजली बिल , दुकान का किराया आदि व्यापारी व उसके परिवार का पूर्ण रूप से दोहन कर देगा। उसके समक्ष जीवन और मरण की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। 
अतः केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर वर्तमान व भविष्य की संभावित समस्या के निदान के लिए तत्काल निर्णय लेना चाहिए। तभी माननीय प्रधानमंत्री जी का उद्वोधन सार्थक होगा जिसमें उन्होंने कहा था *"जान है तो जहान है"*.
हमारा यह मानना है कि 
*"व्यापारी है तो व्यापार है, उसी से अर्थव्यवस्था साकार है।।"*
श्रवण कुमार नालन्दा जिला,अध्यक्ष, स्वर्ण व्यवसायिक संघ ,बिहार शरीफ ,9931053815,9304457058,सम्पर्क सूत्र