लॉकडाउन के नाम पर गरीब जनता से पुलिस की वसूली
ओबरा थाना के ग्राम बेल के ललन साव बेल मोड़ पर चाय दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। करीब 4-5 वर्ष पूर्व ठनका गिरने से उनके जवान बेटे की मृत्यु हो गयी थी। विगत 2 माह से लॉकडाउन रहने के कारण उनके परिवार के समक्ष भूखमरी की समस्या हो गयी है। 3 दिन पूर्व 09.05.20 को ललन साव अपने पुत्र मनोज साव व पोता लाला के साथ अपना दुकान खोलकर सफाई कर रहा थे। तभी ओबरा थाना की पुलिस जीप से आ रही थी और उसने लॉकडाउन में दुकान खोलने का आरोप लगाकर ललन साव और उनके पुत्र व पोता के साथ मारपीट की। फिर पुलिस ललन साव को जीप में बैठाकर थाना ले जाने लगी और बोलने लगी कि लॉकडाउन में दुकान खोलने के आरोप में जेल भेजेगी। तब तक ललन साव के घर परिवार के लोग पहुंच गये और पुलिस से आरजू विनती करने लगे। थाना के दरोगा जी ने ललन साव से 10 हजार रुपये की मांग किया। ललन साव की पत्नी गांव से किसी भी तरह कर्ज लेकर 3 हजार रुपये ही जुटा पायी। काफी विनती के बाद और चौकीदार जितेन्द्र के पैरवी पर 3 हजार रुपये लेने के बाद दरोगाजी उन्हें छोड़ दिये। गरीबी और लॉकडाउन से जूझ रहे ललन साव 3 हजार रुपये का कर्ज हो जाने पर सपरिवार जहर खाकर आत्महत्या कर लेने की बात कहने लगे। गांव के लोगों के समझाने पर ललन साव पुलिस पर केस करने के लिए तैयार हो गये। ललन साव ने इस बात की सूचना मोबाइल पर पूर्व विधायक सोम प्रकाश को दिया। श्री सोम प्रकाश ने ललन साव से हुई बातचीत की रेकॉर्डिंग पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक को भेजते हुए संबंधित पुलिस पदाधिकारी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कारवाई करने का आग्रह किया ताकि गलत करने वाले पुलिसकर्मियों को सबक मिल सके। साथ ही ललन साव ने भी प्राथमिकी दर्ज करने हेतू अपना आवेदन सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के पास भेजा। परंतु 3 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक उन पुलिसकर्मियों पर कोई कारवाई नहीं हुई। ललन साव के परिजनों पर केस उठाने की धमकी लगातार पुलिस द्वारा दी जा रही है। पुलिसकर्मियों के इन घिनौनी हरकत के कारण आम जनता में काफी आक्रोश ब्याप्त है। यदि पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर ललन साव को इंसाफ नहीं दिया गया तो फिर स्वराज पार्टी लॉकडाउन का उल्लंघन कर आंदोलन करने के लिये बाध्य हो जायेगी।*

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