स्वावलम्बन बनकर ही जीवन शैली सुधारा जा सकता है- रामबाबू पासवान।



 ऑल इंडिया दुसाध परिवार (पंजीकृत ट्रस्ट) के संरक्षक रामबाबू पासवान ने कहा कि इस आपदा के घड़ी में स्वाबलंबन बनकर जीवन शैली को सुधारा जा सकता है।
स्वावलम्बन पर आधारित जीवनशैली  हमेशा से अच्छा तथा आदर्श जीवन पद्धति रही है। भारतीय संस्कृति आदि काल से इसका ज्वलंत उदाहरण रही है। लेकिन विशेषकर 19 वीं सदी से लेकर अब तक हमने स्वावलम्बन को त्यागने तथा परावलंबन को अपनाने की दिशा में ज्यामितीय रफ्तार से प्रगति की है। आज स्थिति यह है कि हम स्वावलंबी जीवन जीने की कल्पना से भी डरने लगे हैं। सोचने लगे हैं बीन नौकर , चाकर, गाड़ी, फ़्लैट ,फ्लाइट , अमला, कफला के भला जी कैसे  सकते हैं!कोरोना के कहर के माध्यम से प्रकृति ने यह सिद्ध करके बतलाना शुरु कर दिया है कि स्वावलम्बन न मात्र श्रेष्ठ जीवन पद्धति है;बल्कि अब इसके बिना किसी का काम भी चलने वाला नहीं है। वस्तुतः परावलंबन गुप्त दुश्मन  है  जो मित्र का नकली रुप धरकर हमारे सुख से जीने के अधिकार को हमसे  छीन लेता है। हमें  अपाहिज तथा पंगु बना देता।है। अब हमें अजगर करे न चाकरी ,पंक्षी करे न काज- वाले दर्शन को त्याग कर अपना हाथ जगन्नाथ के कर्मवादी सिद्धांत को  अपनाना ही होगा तथा पश्चिमी सभ्यता के नकली तथा अतिभौतिकवादी परावलंबी सभ्यता को त्यागना ही होगा। श्री पासवान ने कहा कि यह स्वावलम्बन ( अपना अधिक से अधिक काम खुद करना ) से ही संभव है। यह तनाव मुक्त रहने तथा खुश रहने का अचूक नुस्खा भी है।