बिहारशरीफ-रमजान शरीफ की मुबारक घड़ी धीरे धीरे अब हम से रुखसत हो रही है इसलिए पहला और दूसरा सा मुकम्मल हो चुका है और अब तीसरा अशरा यानी आखिरी के 10 दिन इसको हदीस में जहन्नम से आजादी का आसरा बताया गया है शुरू हो रहा है यानी इन दिनों में बंदा  बारगाह में हाजिर होकर पूरी नदामत के साथ अपने गुनाहों की माफी मांगे तौबा अस्तग़फ़ार करे और अपने मालिक को राजी करके जहन्नम में से निजात हासिल कर ले। इसी आखिरी अश्रेय में एक रात ऐसी है जिसे लैलातुल कदर कहा जाता है जिसकी फजीलत कुरान में बयान की गई है किया हजार महीनों से अफजल रात है और वह मुबारक रात 21, 23,25,27 और 29 की रात है और वह मुबारक रात इन पांच रातों में किसी में भी हो सकती है इसी वजह से रमजान के आखिरी अश्रेय में इत्तेकाफ में बैठने का हुक्म दिया गया है की बंदा जब इतिकाफ मैं बैठेगा तो जरूर शबे कदर को पा लेगा खुद अल्लाह के नबी रमजान का आखिरी अशरा मस्जिद में गुजारा करते थे इस वक्त जबकि मुल्क में लॉक डॉन नफीज है और हुकूमत की जानीब से पाबंदी लगी हुई है बहुत सारे लोग तो इत्तेकाफ नही कर सकते लिहाज़ा हर मोहल्ले से 1-2 आदमी इत्तेकाफ पर बैठे ताकि पूरे मोहल्ले वालों के तरफ से कफ़्फ़ारा अदा हो जाए बाकी लोग अपने घरों में सब्र का साथ रहते हुए ज़िक्र,तिलावत,दुआ अस्तग़फ़ार करते रहे।
अपने घरों में रहकर इन मुबारक रातों में अपने घरों में ही रहकर इन मुबारक रातों में अपने लजे और पूरे मुल्क की सलामत के लिए दुआ करें।